जेडी न्यूज विजन…
सन्तोष कुमार गुप्ता….
गोरखपुर : : कौड़ीराम : पांडेपार स्थित बाबा बम्बनाथ मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन कथावाचक पं. अच्युतानंद शास्त्री ने श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक संदेश दिए। उन्होंने कहा संसार का प्रत्येक संयोग अंततः वियोग के लिए ही है। यह समस्त जीवन एक यात्रा के समान है, जिसमें हम सभी यात्री हैं। निश्चित समय तक साथ चलने के बाद प्रत्येक यात्री को अपनी-अपनी मंजिल पर उतर जाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जीवन को रणभूमि नहीं, बल्कि रंगभूमि मानकर जीना चाहिए। रंगभूमि में प्रेम का विस्तार होता है और प्रेम के माध्यम से ही भगवान की प्राप्ति संभव है। मनुष्य को प्रत्येक मिलन को अंतिम मिलन समझकर प्रेम और सद्भाव के साथ व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि यह संसार क्षणभंगुर है।

कथा को आगे बढ़ाते हुए पं. शास्त्री ने मिथिला में भगवान श्रीराम तथा उनके तीनों भाइयों के विवाह उत्सव और विदाई प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। राजा जनक द्वारा माता जानकी को अश्रुपूरित नेत्रों से विदा करने का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और कई श्रोताओं की आंखें नम हो गईं। कथा के अंतिम दिवस भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम में कथा के मुख्य यजमान गुलाब रध्वज उर्फ महंथ सिंह रहे। मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डा. धर्मेंद्र सिंह ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सनातन संस्कृति के संरक्षण और धार्मिक आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कथा आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर सहजनवा विधायक प्रदीप शुक्ल, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री विभ्राट चंद्र कौशिक, भाजपा नेता अष्टभुजा शुक्ल, जिला पंचायत सदस्य विशाल ध्वज सिंह, नरेंद्र ध्वज सिंह, नगर पंचायत अध्यक्ष सुमन सिंह, संजय सिंह पैना, रणविजय शाही, अखिलेश रध्वज सिंह बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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