जेडी न्यूज विजन…..
पुवाया /शाहजहांपुर : : कानून का खौफ क्या होता है, यह शायद ग्राम नाहिल के इस कुख्यात भूमाफिया की डिक्शनरी में लिखा नहीं है। जिस शख्स पर पहले से ही संगीन धाराओं में मुकदमों की लंबी फेहरिस्त हो, जिसके खिलाफ प्रशासन ‘गुंडा एक्ट’ तक की कार्रवाई का डंडा चला चुका हो, वह सुधरने के बजाय नाहिल की जमीनों पर राज चला रहा है। गुंडा एक्ट की कार्रवाई भी इस माफिया के हौसलों को पस्त नहीं कर पाई, बल्कि इसके बाद तो इसने अवैध वसूली और जमीनों पर डाका डालने का एक पूरा ‘कॉर्पोरेट साम्राज्य’ खड़ा कर लिया है।
आइए देखते हैं कि कैसे पुलिस और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में ‘अपराधी’ दर्ज यह भूमाफिया नाहिल की छाती पर अपना नंगा नाच जारी रखे हुए है।
पूर्व में एक बड़ी महिला नेता से इस माफिया की काफी करीबी रही है उस वक्त राजनैतिक रसूख की दम पर काफी फर्जीवाड़ा किया गया। ऐसे आदतन अपराधियों से नेताओं को भी दूरी बना कर रखनी चाहिए ।
1. आदतन अपराधी की पहली बड़ी डकैती: ‘संजय नगर’ (फर्जीनगर)
इस माफिया के काले सफर की शुरुआत हुई ग्राम नाहिल की जंगल-झाड़ी और ऊसर-बंजर जमीनों को निगलने से। जो जमीनें पर्यावरण के संतुलन, ग्राम समाज के विकास या मवेशियों के चरने के लिए सुरक्षित होनी चाहिए थीं, उन पर इस हिस्ट्रीशीटर ने रातों-रात अपना बोर्ड टांग दिया। फर्जी कागजात तैयार किए गए, चूना डाला गया और सीधे-साधे, गरीब लोगों को फंसाकर अवैध प्लाटिंग का गंदा खेल खेला गया।
नियमों को ताक पर रखकर बसाया गया यह **’संजय नगर’** असल में नाहिल का सबसे बड़ा **’फर्जीनगर’** है। अदालतों और थानों के चक्कर काटने में माहिर इस शातिर अपराधी को अच्छे से पता था कि यहाँ की प्रशासनिक व्यवस्था इतनी रीढ़विहीन है कि मुकदमों के बोझ तले दबा होने के बावजूद वह एक और नया अवैध नगर आसानी से खड़ा कर सकता है।
2. रोड घेरकर ‘गुंडा-टैक्स’ की वसूली
‘संजय नगर’ के फर्जीवाड़े से जब इस अपराधी के हौसले सातवें आसमान पर पहुंच गए, तो इसने मुख्य रोड की सरकारी जमीन और झाड़ियों को अपनी बपौती मान लिया। जो जमीन सड़क चौड़ीकरण और राहगीरों के लिए खाली होनी चाहिए थी, उसे घेरकर इस माफिया ने अपना वसूली अड्डा बना लिया।
* **गरीबों के निवाले पर डाका:** सड़क किनारे दो वक्त की रोटी के लिए अपनी छोटी सी गुमटी या खोखा रखने वाले लाचार गरीबों से यह माफिया हर महीने मोटी रकम ऐंठ रहा है। सरकारी जमीन पर खोखा रखवाने का ‘परमिट’ यह गुंडा खुद बांट रहा है। जिस अपराधी को जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए, वह खुलेआम गरीबों को डरा-धमकाकर उनका आर्थिक शोषण कर रहा है।
3. नीचता की पराकाष्ठा: बेजुबान गायों पर भी ‘जजिया कर’!
इस भूमाफिया की हवस का घड़ा इस कदर लबालब भरा है कि इसने इंसानों को तो लूटा ही, मूक पशुओं को भी नहीं बख्शा। रोड किनारे की झाड़ियों या पेड़ों की छांव में अगर किसी गरीब ग्रामीण की गाय खड़ी हो जाए, तो यह गुंडा अपने लठैतों के साथ वहाँ भी ‘गौ-टैक्स’ (पार्किंग चार्ज) वसूलने पहुंच जाता है।
> **सोचिए, व्यवस्था कितनी लाचार है!* जिस पर गुंडा एक्ट लगा हो, वह बेजुबान जानवरों के खड़े होने पर भी जुर्माना वसूल रहा है। यह सिर्फ अवैध वसूली नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का घोर कत्ल और घिनौना पाप है।
>
तीखा सवाल: गुंडा एक्ट और मुकदमों के बाद भी प्रशासन नतमस्तक क्यों?
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल स्थानीय पुलिस, राजस्व विभाग और जिला प्रशासन पर खड़ा होता है।
* एक ऐसा अपराधी जिस पर पूर्व में ही काफी मुकदमे दर्ज हैं, जिस पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई हो चुकी है, वह जेल के भीतर होने के बजाय सरेआम सरकारी जमीनों पर कब्जा कैसे कर रहा है?
* क्या नाहिल के अधिकारियों को इस हिस्ट्रीशीटर का यह नया ‘वसूली उद्योग’ दिखाई नहीं देता?
* या फिर इस माफिया के अवैध पैसों की खनक के आगे कानून के रखवालों ने अपने कान और आंखें दोनों बंद कर लिए हैं?
जब एक आम आदमी पर छोटा सा आरोप लगता है, तो पुलिस उसकी पूरी कुंडली खंगाल लेती है। लेकिन जब एक आदतन अपराधी पूरी सरकारी जमीन निगल रहा हो, गरीबों को प्रताड़ित कर रहा हो, तो प्रशासन भीगी बिल्ली क्यों बना बैठा है? क्या गुंडा एक्ट की फाइलें सिर्फ दफ्तरों की अलमारियों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं?
प्रशासन से हमारी पुरजोर और तीखी मांग है कि इस दागदार भूमाफिया पर दोबारा और कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके खिलाफ तत्काल ‘गैंगस्टर एक्ट’ के तहत मुकदमा दर्ज कर इसकी अवैध संपत्तियों को कुर्क किया जाए, ‘संजय नगर’ के फर्जीवाड़े की उच्च स्तरीय जांच हो, और रोड किनारे की सरकारी जमीन को तुरंत मुक्त कराया जाए।
कहानी बाकी है।
Jd News Vision