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अखिलेश यादव ने मोहन यादव का बचाव कर एक तीर से साधे कई निशाने….

जेडी न्यूज विजन….

राजनीति के पंडितों में दुविधा का माहौल….

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिजनों और रिश्तेदारों की उज्जैन में तेजी से प्रॉपर्टी बढ़ने के दावों को लेकर आई एक न्यूज रिपोर्ट के बाद कांग्रेस पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसकी राज्य सरकार पर हमलावर है।

मोहन यादव को लेकर किए दावों के बीच यूपी से आए एक बयान ने सबको चौंका दिया। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने धुर विरोधी पार्टी के सीएम मोहन यादव का बचाव करके ना सिर्फ राजनीति के पंडितों को दुविधा में डाल दिया, बल्कि उन्होंने एक तीर से कई निशाने भी साध दिए हैं।

अखिलेश यादव ने लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए खुलकर मोहन यादव का बचाव किया। उन्होंने दो टूक कहा कि मोहन यादव के खिलाफ साजिश की गई है। जमीन को लेकर किए गए दावों को कुंद करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि वह पहले रियल स्टेट का कारोबार करते थे। सपा प्रमुख ने दावा किया कि मोहन यादव और राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्म को पद से हटाने के लिए साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा में तीन मुख्यमंत्रियों को हटाने की तैयारी है।

क्यों अखिलेश यादव ने किया मोहन यादव का बचाव?

अखिलेश यादव ने भाजपा के सीएम मोहन यादव का बचाव किया तो गली-नुक्कड़ से सोशल मीडिया, अखबारों और टीवी बहस तक तक इसकी चर्चा छिड़ गई। अखिलेश के बयान के मायने और दोनों यादवों के बीच रिश्तों की पड़ताल की जाने लगी। दोनों नेताओं की पूर्व में हुई मुलाकातों की तस्वीरें भी शेयर की जाने लगीं। सोशल मीडिया पर कई तरह के कारण गिनाए जाने लगे। अधिकतर लोगों ने इसमें जाति का एंगल और अखिलेश का ‘यादव’ प्रेम देखा। एक यूजर ने लिखा, ‘आरोपी अगर अपने जाति का हो तो सब उसके बचाव में कूद पड़ते हैं। अखिलेश यादव बीजेपी के नेता का बचाव कर रहे हैं क्योंकि वो नेता इनके जाति का है।’ एक अन्य यूजर ने कहा, ‘सपा मुखिया अखिलेश यादव भाजपा के मुख्यमंत्री का समर्थन कर रहे है क्योंकि मुख्यमंत्री का नाम मोहन यादव है, ये जाति है की जाती नहीं…।’

राजभर ने बताया अलग ही कनेक्शन

इन दिनों सपा में फूट का दावा कर रहे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर इस मुद्दे पर भी अपनी ‘खोज’ लेकर सामने आ गए। उन्होंने अखिलेश यादव के करीबी लोगों की मध्य प्रदेश में संपत्ति का दावा करते हुए कहा कि इसी वजह से अखिलेश ने यह रुख अपनाया है। राजभर ने कहा, ‘अखिलेश जी! एमपी कैडर के आईएएस भरत यादव जो राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं, उनसे आपने अपना रिश्ता छिपा लिया। अखिलेश जी भरत यादव आपके ‘कुबेर’ चंद्रपाल यादव के दामाद हैं। चंद्रपाल यादव सपा के कद्दावर नेता और पार्टी कोषाध्यक्ष रहे हैं। उम्मीद है कि आपको याद आ गया होगा। अखिलेश यादव जी, माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी के नाम पर हुए एक फर्जी खुलासे से आप डर गए? मध्य प्रदेश में हाईवे का रास्ता कहां से जाएगा- यह भरत यादव तय करते हैं या उन्हें इस बात की जानकारी होती है। जो आपके हैं, अपने हैं, खास हैं।’

राजभर ने आगे कहा, ‘इस मामले में अखिलेश जी आपकी तिलमिलाहट बता रही है कि भरत यादव ने आपसे और अपने लोगों से वहां की जमीनों में भारी निवेश करवाया है। और जमीन ‘खाने’ के मामले में सैफई परिवार बहुत अनुभवी है। इसे पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे में सैफई परिवार ने यही किया था। फिरोजाबाद से इटावा तक जमीनें खरीदी गईं और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के रूट को मनमाने तरीके से मोड़ा गया। निजी फायदे के लिए सैफई तक अनावश्यक रूप से रूट का मार्ग घुमाकर एक्सप्रेसवे की दूरी 30 किमी और ज्यादा बढ़ा दी गई। औने-पौने दाम में जमीनों को खरीदकर भारी भरकम मुआवजा वसूला गया।’ राजभर ने कहा कि जांच एजेंसियों को पता लगाना चाहिए कि मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश के कौन-कौन से सफेदपोश निवेशक शामिल हैं।

अखिलेश यादव ने कैसे एक तीर से साधे कई निशाने

पूर्व सीएम अखिलेश यादव नई पीढ़ी के नेताओं में काफी चालाक और महीन राजनीति के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मोहन यादव का बचाव करके एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। सोशल मीडिया पर जाति की जो चर्चा चल रही है, अखिलेश यादव के लिए यह भी फायदेमंद ही है। दरअसल, सपा के लिए यूपी की राजनीति में यादव और मुस्लिम दो सबसे मजबूत स्तंभ रहे हैं और अखिलेश यादव ने मोहन यादव का बचाव करके संभवत: अहीरों को संदेश देने की कोशिश की है। इसके अलावा उन्होंने भाजपा पर साजिश का आरोप लगाकर मोहन यादव के समर्थकों में पार्टी के प्रति असंतोष के बीज बोने की कोशिश की। इसके अलावा उन्होंने महीन तरीके से निशाने पर योगी को भी ले लिया और कहा कि उन्हें हटाने के लिए ही भाजपा मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को हटाना चाहती है। बात यहीं खत्म नहीं होती है, सपा प्रमुख ने उस मध्य प्रदेश कांग्रेस की धार को भी कुंद कर दिया जिसने कभी उनके लिए ‘अखिलेश-वखिलेश’ संबोधन का इस्तेमाल किया था।

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