जेडी न्यूज विजन…
अब खुल रहे हैं परत दर परत राज…
बीस किलोवाट आवासीय कनेक्शन को कमर्शियल में वर्ष 2016 में कर दिया गया था…
लखनऊ : : अलीगंज में जिस अवैध निर्माण में आग लगी थी अब उसमे परत दर परत खुल रहे हैं राज , एक जानकारी के मुताबिक पता चला है कि उसके कमर्शियल बिजली कनेक्शन के लिए भवन स्वामी ने मिलीभगत करके फर्जी एनओसी ली थी। यह एनओसी विद्युत सुरक्षा निदेशालय के तत्कालीन सहायक निदेशक पीके निगम के फर्जी हस्ताक्षर से तैयार की गई थी।
यह खुलासा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के निदेशक गिरीश कुमार सिंह ने किया है।
गिरीश के मुताबिक वर्ष 2022 से पहले आफलाइन एनओसी जारी करने की प्रकिया थी। अग्निकांड के बाद अलीगंज सेक्टर डी -102 के रिकार्ड देखे गए तो वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला के नाम की कोई एनओसी क्रमांक संख्या 26 में नहीं मिली। क्रमांक संख्या 26 में दूसरे उपभोक्ता के नाम एनओसी जारी की गई है।
विद्युत सुरक्षा निदेशालय के रिकार्ड में कोई ब्योरा नहीं
कुल मिलाकर विद्युत सुरक्षा निदेशालय के रिकार्ड में वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला का कोई ब्योरा नहीं मिला। निदेशालय ने उच्च अधिकारियों को भी इसे पूरे मामले की जानकारी भेज दी है। वहीं सवाल खड़ा होता है क्या ऐसी फर्जी एनओसी शहर की अन्य बिल्डिंगों के लिए तैयार तो नहीं की गई होगी? इस पूरी कार्यप्रणाली को लेकर बिजली विभाग और विद्युत सुरक्षा निदेशालय पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोनों विभागों के बीच ऐसा कोई तंत्र नहीं है कि उपभोक्ता के वाणिज्यिक कनेक्शन का आवेदन करते ही निदेशालय को पता हो जाए। निदेशालय से एनओसी लेने के लिए उपभोक्ता को नए सिरे से पूरी प्रकिया अपनानी पड़ती है। अभी तक विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जिम्मेदारी जो ठहराई जा रही थी, उससे निदेशालय ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया है कि जब उसके यहां से एनओसी ही नहीं जारी की गई तो कैसे उसे पता चलेगा कि नवीनीकरण कराने का समय पूरा हो गया है या नहीं ?
मध्यांचल में 57 हजार कमर्शियल कनेक्शन दस किलोवाट से ऊपर
मध्यांलच में 57 हजार कमर्शियल कनेक्शन दस किलोवाट से ऊपर हैं। वहीं लखनऊ में दस किलोवाट या उससे ऊपर भार वाले कनेक्शनों की संख्या 10,706 हैं। सवाल खड़ा होता है क्या इनमें कई एनओसी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला की तरह फर्जी तो नहीं बनाई गई होंगी। इस पर बिजली विभाग व निदेशालय के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
स्थायी कनेक्शन लेकर ही बनवाया था वीरेंद्र ने मकान, जो नियमानुसार है गलत
जिस कोचिंग सेंटर में आग लगी थी, उसके निर्माण में अस्थाई बिजली कनेक्शन देने के बजाए सीधे स्थाई कनेक्शन एक किलोवाट का जारी कर दिया गया था।नियमानुसार स्थायी कनेक्शन से मकान का निर्माण नहीं किया जा सकता है। जब कनेक्शन दिया गया, उस समय पुरनिया बिजली उपकेंद्र के तत्कालीन जेई विरेंद्र सिंह, एसडीओ शैलेश शर्मा व डालीगंज खंड के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार वर्मा थे, इनकी जांच भी शुरू हो सकती है।
यहीं नहीं, एक किलोवाट बिजली कनेक्शन को चंद माह बाद सीधे 20 किलोवाट लोड आवासीय में कर दिया गया था। फिर अपने कनिष्ठों की रिपोर्ट को सही मानते हुए तत्कालीन अधिशासी अभियंता अशोक ने बीस किलोवाट आवासीय कनेक्शन को कमर्शियल में वर्ष 2016 में कर दिया था। इसमें फर्जी विद्युत सुरक्षा निदेशालय की एनओसी लगा दी गई थी।
मेरे पास जो एनओसी है, वह असली है या नकली, मुझ़े नहीं पता, उस पर विद्युत सुरक्षा निदेशालय लिखा हुआ है। मैने कोई उसकी जांच नहीं कराई है। निदेशक क्या कह रहे हैं, वहीं बता सकते हैं।
-वीपी सिंह, मुख्य अभियंता, जानकीपुरम जोन
(अंशू दीक्षित)
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