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बरेली : : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की एक अदालत ने अपनी ही मां के साथ दुष्कर्म करने के दोषी बेटे को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर ₹22,000 का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य और मानवता को शर्मसार करने वाला है, इसलिए दोषी के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
मामले के अनुसार, घटना लगभग चार वर्ष पहले की है, जब एक विधवा महिला ने अपने ही बेटे पर दु*ष्कर्म का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया। जांच के दौरान अन्य साक्ष्य भी जुटाए गए।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, अन्य गवाहों और मेडिकल व डीएनए रिपोर्ट सहित कई महत्वपूर्ण साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए। अदालत ने इन सभी साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपी के अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। डीएनए रिपोर्ट और पीड़िता के बयान सहित अन्य गवाहों की गवाही ने भी मामले को मजबूत आधार प्रदान किया। बचाव पक्ष की दलीलों के बावजूद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) की अदालत ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा दी। इसके साथ ही ₹22,000 का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अपने फैसले में अदालत ने कहा कि परिवार के भीतर इस प्रकार का अपराध समाज की नैतिक और सामाजिक व्यवस्था पर गंभीर आघात है। ऐसे मामलों में सख्त सजा देना आवश्यक है ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगाई जा सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।
क्या है पूरा मामला?
करीब चार वर्ष पहले पीड़िता ने अपने ही बेटे पर दु*ष्कर्म का गंभीर आरोप लगाया था। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया और अन्य आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए।
जांच में क्या सामने आया?
पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और कई गवाहों के बयान दर्ज किए। जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में आरोपपत्र (चार्जशीट) अदालत में दाखिल किया गया।
अदालत में चली लंबी सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, गवाहों और विशेषज्ञों की गवाही अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। डीएनए रिपोर्ट सहित अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया गया। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन किया।
डीएनए रिपोर्ट और गवाही बनी फैसले का आधार
अदालत ने माना कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और वैज्ञानिक रिपोर्टों ने भी अभियोजन के मामले को मजबूत किया। न्यायालय ने कहा कि सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध होते हैं।
दोषी को आजीवन कठोर कारावास
सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही ₹22,000 का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना जमा न करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अदालत की टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ इस प्रकार के गंभीर अपराध समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक हैं और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कठोर दंड आवश्यक है। न्यायालय ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्य और विश्वसनीय गवाही के आधार पर दोष सिद्ध होने पर कठोर सजा देना न्यायहित में है।
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