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आजमगढ़: 5 बार के विधायक आलमबदी का निधन, सादगी से जीता दिल! 90 साल की उम्र में कहा अलविदा…

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पांच बार विधायक फिर भी टीनशेड वाला घर, रोडवेज से सफर, आलम बदी का हर कोई कायल….

सियासत में सादगी !  मिसाल थे सपा के वरिष्ठ विधायक आलम बदी, साइकिल-स्कूटर से जाते थे विधानसभा…

समाजवादी पार्टी के विधायक आलम बदी का गुरुवार की सुबह निधन हो गया। यूपी के सबसे बुजुर्ग के साथ ही सबसे ईमानदार विधायक आलम बदी आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से पांच बार जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

अपनी ईमानदारी के साथ ही सादगी के लिए भी वह जाने जाते थे। वह कई मायनों में खास हैं। उन्हें मुलायम सिंह ने अपनी सरकार में मंत्री बनाना का प्रस्ताव दिया लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया था। पांच बार के विधायक होने के बाद भी वह टीन शेड वाले घर में रहते हैं। किसी लग्जरी एसयूवी की जगह रोडवेज का इस्तेमाल सफर के लिए करते हैं।

आज भी आजमगढ़ के कुर्मीटोला मोहल्ले में एक साधारण पुराने टीनशेड वाले घर में रहते थे। रोडवेज बस, साइकिल या स्कूटर से सफर करते थे। छह दशक तक राजनीति में रहने के बाद भी उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। जब उन्हें मंत्री बनाने की पेशकश की गई तो यह कहकर मना कर दिया कि वह जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। मंत्री बनने से आम लोगों से दूरी बनने की बात कहते थे। चुनाव के बाद भी हमेशा आम लोगों के बीच रहते और उनकी समस्याओं को सुनते और अपने स्तर से पूरा कराने की कोशिश करते रहते थे।

चुनाव में पोस्टर बैनर तक नहीं छपवाते

चुनावों में जहां एक तरफ लोग पानी की तरह पैसा बहाते हैं, आलम बदी अपने चुनावों के दौरान पोस्टर बैनर तक नहीं छपवाते थे। उनका कोई सोशल मीडिया एकाउंट भी नहीं था। इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग से डिप्लोमा करने के बाद राजनीति में आने वाले आलम बदी ने समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उनकी सादगी का हर कोई कायल रहा।

महात्मा गांधी को मानते आदर्श

आलम बदी ने एक बार अपनी सादगी के पीछे की कहानी बताई थी। जब एक बार उनसे पूछा गया कि विधायक लोग बंगले में रहते हैं, गाड़ियों पर चलते हैं, फिर आप इस तरह से टीन वाले घर में क्यों रहते हैं। इस पर उनका कहना था कि हमें जो आजादी मिली है, उसका मतलब मौज नहीं है। दुनिया में हर चीज संभव है। कहा कि महात्मा गांधी भी बैरिस्टर थे। उनके पास भी बहुत पैसा था। लेकिन सबकुछ छोड़कर जनता की सेवा में लग गए। खड़ाऊ, धोती और जनेऊ के साथ पूरा जीवन बीता दिया।

1996 में पहली बार बने विधायक, क्यों ठुकराया मंत्री का पद

आलम बदी पहली बार 1996 में आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद वर्ष 2002, 2012, 2017, और 2022 में इसी सीट से जीते और विधानसभा पहुंचे। बीच में केवल एक बार बसपा की लहर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2007 में बसपा नेता अंगद यादव ने उन्हें हराया था। भाजपा की लहर में भी भाजपा प्रत्याशी मनोज यादव को पिछले चुनाव में 34,187 मतों से हराया था। एक बार मुलायम सिंह ने उन्हें मंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन उन्होंने स्वीकार नहीं किया था। मंत्री पद ठुकराते हुए कहा था कि इससे उनकी जनता से दूरी बन जाएगी। वह जनता बीच रहना और उनकी सेवा करना चाहते थे..

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