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अलीगंज अग्निकांड : : 10 साल की लापरवाही, 15 छात्रों की मौत…अब SC ने LDA वीसी को किया तलब, पूछा…?

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लखनऊ : : राजधानी के अलीगंज अग्निकांड  में 15 छात्रों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

अदालत ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार को अवमानना नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।

साथ ही कोर्ट ने उन्हें सीलबंद लिफाफे में विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट लेकर आने को भी कहा है।

SIT रिपोर्ट के साथ पेश होने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार से कहा है कि अगली सुनवाई, जिसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है, उसमें वह सीलबंद लिफाफे में एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट लेकर अदालत में उपस्थित हों।

कोर्ट ने यह भी पूछा है कि न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ कर रही थी।

वापस ले लिया गया था 2016 में गिराने का आदेश

सुनवाई के दौरान न्यायालय के एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने अदालत को बताया कि जिस इमारत में आग लगी थी, उसे ध्वस्त करने का आदेश 10 मई 2016 को जारी किया गया था।

लेकिन इसके बाद 5 जुलाई 2016 को उसी प्राधिकरण ने तकनीकी आधार पर अपना ही आदेश वापस ले लिया।

उन्होंने अदालत को बताया कि इसके बाद कई वर्षों तक उस भवन के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

आखिरकार जून 2026 में उसी इमारत में हुए अग्निकांड (Fire Tragedy) में 15 छात्रों की मौत हो गई।

हादसे के बाद ही की गई भवन पर कार्रवाई

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अग्निकांड (Fire Tragedy) के बाद संबंधित भवन के खिलाफ कार्रवाई की गई और उसे ध्वस्त कर दिया गया।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कार्रवाई हादसे के बाद की गई, जबकि पहले से ही कार्रवाई करने के पर्याप्त आधार मौजूद थे।

मास्टर प्लान के उल्लंघन पर SC नाराज

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि रिकॉर्ड से साफ है कि मास्टर प्लान (Master Plan) में तय भूमि उपयोग (Land Use) का खुलेआम उल्लंघन हुआ।

इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। अदालत ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह केवल एक भवन का मामला नहीं है, बल्कि शहरी नियोजन कानूनों और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा विषय है।

इन्हें बनाया गया पक्षकार

अदालत ने बताया कि 25 मार्च 2026 के अपने आदेश में इस मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया गया था। इसी के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का मानना है कि राजधानी शहरों में मास्टर प्लान (Master Plan), भवन उपविधियों और सार्वजनिक सुरक्षा नियमों के पालन का मुद्दा राष्ट्रीय महत्व का है।

अलीगंज अग्निकांड में अब तक क्या-क्या हुआ?

इस मामले में 10 मई 2016 को संबंधित भवन को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया था।

इसके बाद 5 जुलाई 2016 को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने तकनीकी आधार पर अपना ही आदेश वापस ले लिया। फिर 22 जून 2026 को लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर (Coaching Centre) में आग लगने से 15 छात्रों की मौत हो गई।

23 जून 2026 को मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। 25 जुलाई 2026 को हादसे के बाद संबंधित भवन को ध्वस्त कर दिया गया।

अब 6 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एलडीए (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार को अवमानना नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।

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