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दिल में थोड़ा सब्र कायम रखता हूँ…

Jdnews Vision…

न तो उनके लौटने की उम्मीद

और ना ही भूल जाने की हिम्मत…

क्या से क्या हो गया

ऐसी अपनी फूटी किस्मत….

शायद गलती से रास्ता भटक क़र आ जायँ वो

इसलिए हमेशा दरवाज़ा खुला रखता हूँ …

आज भी उनका इंतज़ार करता हूँ …

कल भी इंतज़ार था उनका

आज भी इंतज़ार करता हूँ…

अँधेरा रहता है हमारी गली में

इसलिए बाहर की लाइट जला कर रखता हूँ…

पहचान लें घर ढंग से वो अपना

इसीलिए द्वार पर दीपक जला कर रखता हूँ..

उम्मीद कायम है अभी लौटने की पूरी उनके…

इसलिए दिल में थोड़ा सब्र कायम रखता हूँ

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