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मछुआरे के जाल से निकलकर, पानी में
……..आज़ादी से, मछली की तरह!
पिंजरे से निकलकर, बाहर की दुनिया में
……..जैसे पेड़ पर बैठा तोता!
शेर की खाल छोड़कर, झाड़ियों से कूदते हुए
……..जैसे हिरण, घास पर चलते हुए!
हरि के चक्र पर मारा गया अजगर
……..जैसे गुज़र गया कोई आँगन!
(2)
सालों से मर रहा देश,
सालों की तकलीफ़ के बाद,
भारतम्बा, जिसने आज़ादी पाई है,
ऐसे महान इंसान की प्रार्थना हो!
स्वतंत्रता दिवस भास्वत पर्व राजा!
….भारत माता वैभव वरम्मा!
जब आप साल में एक बार मनाते हैं
….हम अपने दिलों में आपकी पूजा करते हैं
कई सदियों के शासन के दौरान
….भारत माता ने कई मुश्किलें झेलीं
बड़े नेताओं की बड़ी कोशिशों से
….आपने बलिदान का फल पाया है
विजय स्वतंत्रता दिवस! विजय विजय
विजय भारत माता! विजय विजय
विजय देश के नेताओं! विजय विजय
विजय भारत के भाइयों! विजय विजय
वंदे मातरम के मंत्र के साथ
(3)
हम बहुत हिम्मत लेकर आए हैं!
देश के सभी लोगों की आवाज़ के साथ
हमने आज़ादी का शंखनाद किया है!
हमने अपनी जान कुर्बान की है
गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ने के लिए!
हमने आज़ादी का परचम फहराया है
वीरों के खून की विजयी यात्रा में!
जब देश आजाद हुआ था,
हमारे वीर जवानों ने,
जो लड़के लड़ते जान गवाई,
तब देश हुआ था आजाद,
भगत राजगुरु सुखदेव की,
कुर्बानी से हमारे आंखें भर गई,
वीर जवानों ने सरहद पर,
खड़े होकर हमें दिलाई आजादी,
आजादी के खुशबू से,
देश भक्ति हम मे उभर गया,
तिरंगा ही हमारी पहचान है,
यही आजादी का अरमाना है,
झंडा ऊंचा रहे हमारा,
सभी कर्मों को भूलकर,
हम सब एकजुट होकर,
आजादी का गीत गाए,

के ·वी· शर्मा……
लेखक एवं संपादक,
विशाखा संदेशम एवं
विशाखापट्टनम दर्पण
हिंदी पत्रिका
विशाखापत्तनम
आंध्र प्रदेश
दूरभाष7075408286
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