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सूर्य प्रकाश शर्मा, वरिष्ठ संपादक,
जेडी न्यूज़ विज़न
मात्र 3–4 वर्ष में जर्जर होने लगे नए रेल आवास, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल…
नागपुर : : 18 अगस्त रेलवे कर्मचारियों के लिए बेहतर एवं सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हाल ही में अजनी में निर्मित रेल आवासों की स्थिति ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों पुराने एवं जर्जर रेल आवासों की समस्याओं से कर्मचारी पहले ही परेशान थे, लेकिन अब वर्ष २०२१-२२ में निर्मित ९६ क्वार्टरों की स्थिति भी चिंता का विषय बनती जा रही है।
इन आवासों को बने हुए महज तीन से चार वर्ष ही हुए हैं और इनमें कर्मचारी निवास करने लगे हैं। इसके बावजूद भवनों की बाहरी दीवारों से प्लास्टर उखड़ने लगा है तथा कई आवासों की छतों से बारिश के दौरान पानी टपकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इतने कम समय में नए भवनों में इस प्रकार की खामियां सामने आना निर्माण की गुणवत्ता एवं अनुरक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि यदि नए निर्माण की स्थिति महज तीन-चार वर्षों में ही ऐसी हो रही है, तो यह विचारणीय विषय है कि इन भवनों का निर्माण किस गुणवत्ता के मानकों के तहत किया गया था और इनकी वास्तविक निर्माण गुणवत्ता, निरीक्षण एवं निर्धारित आयु का मूल्यांकन किस प्रकार किया गया।
सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ (CRMS) ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि इन नए रेल आवासों का तत्काल उच्चस्तरीय तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, निर्माण में प्रयुक्त सामग्री एवं गुणवत्ता मानकों की जांच की जाए तथा जहां भी प्लास्टर उखड़ने, सीलन अथवा छत से पानी रिसने जैसी समस्याएं हैं, उनका स्थायी समाधान कराया जाए।
संघ ने यह भी कहा कि रेलवे कर्मचारी वर्षों से जर्जर आवासों की समस्या झेल रहे हैं।
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