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आनंदालय ने हमारे हमेशा रहने वाले सिंबल के साइंटिफिक और कल्चरल और सोशल महत्व पर एक ऑनलाइन वर्कशॉप ऑर्गनाइज़ की। इस बुधवार को इंडियन कल्चर और कल्चर प्रोजेक्ट आनंदालय का स्पेशल एक्सपेरिमेंटल सिस्टम शुरू किया गया।
गुजरात यूनिवर्सिटी की वैदिक स्टडीज़ की सेकंड ईयर की स्टूडेंट कुमारी मेथबेन पटेल ने 20 अगस्त 2026 की शाम को प्रो. अतुलभाई उनागर के गाइडेंस में “हमारे हमेशा रहने वाले सिंबल” के साइंटिफिक और कल्चरल और सोशल महत्व पर एक ऑनलाइन वर्कशॉप ऑर्गनाइज़ की।इस प्रोग्राम में मेथबेन पटेल ने पहली बार स्टूडेंट्स और एक्सपर्ट्स के सामने हमारे सिंबल, कल्चरल सिंबल और ट्रेडिशन के बारे में बहुत सुंदर बात कही।

तिलक, बिंदी, चांदलो, कंठी और माला जैसे कल्चरल सिंबल को साइंटिफिक और कल्चरल कारणों से समझाया गया।हमारे ये सिंबल ज़िंदगी में क्यों ज़रूरी हैं? उन्होंने उदाहरणों के साथ इसके बारे में बहुत अच्छी तरह समझाया।आज के ज़माने में इंडियन नॉलेज सिस्टम धीरे-धीरे कम होता गया है। उन्होंने महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले पारंपरिक गहनों जैसे कंगन, अंगूठी, चूड़ी, साइड बैंड, ईयर रिंग, नथ, हार, लॉकेट, कमरबंद वगैरह के बारे में साइंटिफिक और सोशल वजहों के साथ जानकारी दी।उन्होंने पुरुषों द्वारा पहने जाने वाले जनोई, रुद्राक्ष, भस्म और रक्षा सूत्र के शारीरिक और मानसिक असर के बारे में बात की।तिलक से आज्ञा चक्र जागने से कॉन्संट्रेशन बढ़ता है। भगवान तक पहुंचने का रास्ता आसान हो जाता है।

चंदन का तिलक मन को शांति देता है।
चंदलो त्रि-नेत्र को जगाता है।युद्ध में जाते समय अंगूठे से तिलक किया जाता है।
इस बारे में और जानकारी देते हुए उन्होंने एक रिसर्च की परिभाषा में कहा कि उनकी तरफ से एक सर्वे किया जाएगा और एक कम्पेरेटिव स्टडी की जाएगी।
कहा गया कि स्वामी भद्रेश भाई की स्वामी नारायण की किताब में ‘सिंबल्स’ के बारे में और जानकारी दी गई है, जिससे सिंबल्स की समझ मिलती है।
इस प्रोग्राम में प्रोफेसर अतुल उनागर गुजरात यूनिवर्सिटी, मशहूर लेखक, सोशल वर्कर और पूर्व ऑफिस सुपरिटेंडेंट डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर अहमदाबाद डॉ. गुलाब चंद पटेल, गुजराती भाषा की जानकार श्रीमती हार्दिका बेन गढ़वी, तृप्ति बेन ठाकर, दीप्ति बेन शाह टीचर और विक्रम भाई मौजूद थे। जाने-माने लोगों, पेरेंट्स और स्टूडेंट्स ने सवाल पूछकर, प्रॉब्लम सॉल्व करके और पूरी गाइड देकर सब्जेक्ट पर और जानकारी दी। इस प्रोग्राम में बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स और टीचर्स ने हिस्सा लिया।
डॉ शैलेष वाणिया शैल *खंभोलज साहित्य सेवा संस्था राष्ट्रीय अध्यक्ष आणन्द गुजरात*
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