Jdnew Vision….
*आप के मनपसंद शख़्स की बातों और लहज़े में…
इतना असर तो होता ही है…
*कॉल बंद करने के बाद भी बहुत देर तक मुस्कुराते रहते हो…
फिर कुछ पल गुम सुम रहकर…
गुज़री बातों में खो जाते हो…
वो बीते क्षण याद करके
कभी खुश तो कभी उदास हो जाते हो…
यही सब तो जीने की वज़ह बन जाता है…
समस्या तो तब होती है…
ज़ब बहुत वक़्त तक फोन नहीं आता है….
फिर बेचैन हो जाता है ये दिल
और मन विचलित हो जाता है…
फिर शुरू होता है मन में तरह तरह के विचार
उठने का जो सिलसिला…
रहता है फिर काल का इंतज़ार
फिर सोच – सोच क़र दिल हो जाता है बेज़ार….
(आर डी बाजपेई )
संपादक….
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