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सत्य और मर्यादा की* *पूर्णाहुति: श्री राम कथा के* *अंतिम अध्याय ने भक्तों* *को किया भावविभोर….

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संतोष कुमार गुप्ता…..

*सत्य और मर्यादा की* *पूर्णाहुति: श्री राम कथा के* *अंतिम अध्याय ने भक्तों* *को किया भावविभोर….

 

*हर भक्तों के आखे नम

*प्रत्येक दिन हजारों राम भक्तों ने किया कथा का रसपान व् प्रसाद भोग

 

गोरखपुर: : 14 वर्षों के वनवास और लंकापति रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण का अयोध्या लौटना ही श्री राम की अयोध्या वापसी का प्रसंग कहलाता है। उक्त बातें आचार्य कथा व्यास श्री धीरज कृष्ण महाराज ने बताई।

तारामंडल स्थित उर्वी रिसोर्ट में कथा के अंतिम दिन के यजमान श्री अशोक ऐश्वरम विला परिवार केमुखिया श्रीदुर्गा बाबू जी,इंजी.प्रदीप श्रीवास्तव (पूर्व अधिकारी रेलवे )डॉ. मनोज श्रीवास्तव( प्रसिद्ध शिक्षाविद) इंजीनियर रंजीत कुमार इंजीनियर ,संजीत कुमार व समाजसेवक मंजीत श्रीवास्तव (बाबू) रहे। आज की कथा के दिन का प्रसाद डॉक्टर अशोक कुमार श्रीवास्तव फैंस एसोसिएशन के तरफ से रहा ।

धीरज शास्त्री जी ने कहा की रावण का वध करने के बाद प्रभु राम ने लंका पर विजय प्राप्त की। पुष्पक विमान से यात्रा: लंका विजय के पश्चात भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण कुबेर के पुष्पक विमान में सवार होकर अयोध्या के लिए रवाना हुए। भरद्वाज मुनि और हनुमान मिलन: अयोध्या लौटने से पहले मार्ग में प्रभु राम प्रयागराज के पास भरद्वाज मुनि के आश्रम पहुंचे। यहीं उन्होंने हनुमान जी को अपने आगमन का संदेश लेकर भरत के पास अयोध्या भेजा। 14 वर्ष पूरे होने पर जब श्रीराम अयोध्या पहुँचे, तो भाई भरत और पूरी अयोध्या नगरी ने उनका स्वागत किया। अयोध्यावासियों ने खुशी में घी के दीये जलाए, जिसे आज [दीपावली पर्व के रूप में मनाया जाता है।

इसी क्रम में काल से हुई एक शर्त के अनुसार, जब श्री राम एकांत में बात कर रहे थे तब लक्ष्मण जी वहाँ आ गए। वचन के अनुसार लक्ष्मण जी को मृत्युदंड मिलना चाहिए था, लेकिन राम जी ने दंड देने के बजाय उनका त्याग कर दिया। इसके बाद लक्ष्मण जी ने सरयू नदी में जाकर जल समाधि ले ली। लक्ष्मण जी के जाने के बाद श्री राम ने भी अपने अवतार का समय पूरा हुआ जाना। उन्होंने अपने भाइयों (भरत और शत्रुघ्न) और अयोध्या के सभी जनों, पशु-पक्षियों तथा जीव-जंतुओं को सरयू नदी के जल में प्रवेश कराया और सबको बैकुंठ धाम की प्राप्ति कराई। । अंत में भगवान श्री राम ने स्वयं सरयू नदी में प्रवेश किया और अपने महाप्रयाण द्वारा अपनी मानवीय लीला का समापन किया।

सर्वश्री विजय कौशल ,आचार्य अभिषेक मिश्रा, शिवम् शास्त्री, गोविन्द श्रीवास्तव, धीरज वर्मा, अमित श्रीवास्तव,समाजसेवक मंजीत श्रीवास्तव,अविनाश श्रीवास्तव,शिवम मिश्रा, विश्व दीपक श्रीवास्तव सुनील श्रीवास्तव,, हिमांशु मिश्रा, संतोष त्रिपाठी,सर्वेश दुबे , गोलु सिंह, अवधेश चन्द, निप्पु तिवारी, सुरेन्द्र मिश्र ,संतोष त्रिपाठी,सर्वेश दुबे , गोलु सिंह, अवधेश चन्द, प्रभाकर, राजेश सिंह, जगन्नाथ श्रीवास्तव, सुधीर सिंह ,शुभम त्रिपाठी ,श्री कृष्ण श्रीवास्तव, राम नयन यादव, विश्व दीपक, , प्रशांत, निखिल त्रिपाठी, जगन्नाथ श्रीवास्तव, सतीश ,राजेश सिंह सहित आदि का सहयोग व् उपस्थिति रही

 

आचार्य अभिषेक जी

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