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लखनऊ : : आज 28 सितंबर, 2026: माइंडशेयर (MINDSHARE) ने लखनऊ क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज के सहयोग तत्वावधान में लखनऊ क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज, लखनऊ के फेयरफील्ड हॉल में “साहस, जीवटता (रेज़िलिएंस) और नेतृत्व” विषय पर एक विचारोत्तेजक कॉन्क्लेव का आयोजन किया। सर्वप्रथम उर्दू विभाग की सहायक आचार्या डॉ. शबाहत फ़ातिमा जी ने कार्यक्रम की शुरुआत की और सभी अतिथियों को मंच पर आमंत्रित कर अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह द्वारा सम्मानित किया गया इसी क्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या महोदय डॉ.ईशा वी. लाल जी इन प्रार्थना कर सभी अतिथियों को दीप प्रज्वलन हेतु मंच पर आमंत्रित किया गया दीप प्रज्वलन के पश्चात कॉन्क्लेव में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, चिकित्सा, सार्वजनिक नीति और अकादमिक जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने यह चर्चा करने के लिए हिस्सा लिया कि प्रतिकूल परिस्थितियों में साहस किस प्रकार जीवटता और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व की नींव बन सकता है।
कॉन्क्लेव का विषय डॉ. अखिलेश गुप्ता के संस्मरण “अनब्रोकन: माय बैटल विद कैंसर एंड द विल टू लीड” से प्रेरित था, जो एडवांस ओरल (मुंह के) कैंसर के साथ उनके संघर्ष और गंभीर चिकित्सा चुनौतियों के बावजूद जनसेवा तथा नेतृत्व में लौटने की उनकी उल्लेखनीय यात्रा को बयां करता है।
डॉ. अखिलेश गुप्ता ने ‘अनब्रोकन’ (अटूट) रहने की अपनी यात्रा साझा की
कॉन्क्लेव का मुख्य भाषण सिक्किम हिमनद खतरा आयोग के अध्यक्ष; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार; विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के पूर्व सचिव; और विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (SERB) के पूर्व सचिव डॉ. अखिलेश गुप्ता द्वारा दिया गया। डॉ. गुप्ता विशिष्ट शैक्षणिक और सलाहकार के रूप में कई प्रमुख आईआईटी (IITs) से भी जुड़े हुए हैं।
अपनी पुस्तक “अनब्रोकन: माय बैटल विद कैंसर एंड द विल टू लीड”के बारे में बात करते हुए, डॉ. गुप्ता ने संस्मरण के पीछे की अपनी बेहद व्यक्तिगत यात्रा साझा की और उन अनुभवों पर विचार किया।
डॉ. गुप्ता को मार्च 2015 में एक मुख्य भाषण देने के कुछ समय बाद ही एडवांस ओरल कैंसर होने का पता चला था। इसके बाद एक असाधारण रूप से कठिन दौर शुरू हुआ, जिसमें बड़ी सर्जरी, बार-बार असफल रिकंस्ट्रक्शन (पुनर्निर्माण) और जटिल चिकित्सा प्रक्रियाएं शामिल थीं। उनका संस्मरण न केवल कैंसर के इलाज में होने वाले शारीरिक कष्ट को बयां करता है, बल्कि अनिश्चितताओं का सामना करने और आगे बढ़ते रहने के लिए आवश्यक मनोवैज्ञानिक शक्ति को भी दर्शाता है।
इन चुनौतियों के बावजूद, डॉ. गुप्ता राष्ट्रीय जिम्मेदारी के पदों पर लौटे और विज्ञान, उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा सार्वजनिक नीति में अपना योगदान देना जारी रखा। उनकी यात्रा ने यह साबित किया कि नेतृत्व केवल अधिकार के पदों पर बने रहने के बारे में नहीं है, बल्कि गहरी व्यक्तिगत मुश्किलों के क्षणों में भी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध रहने के बारे में है।

“नेवर से डाई”का दर्शन, जो अनब्रोकन का केंद्रीय संदेश है, पूरे कॉन्क्लेव में गूंजता रहा। डॉ. गुप्ता ने दृढ़ संकल्प, आशा और परिस्थितियां बेहद कठिन होने पर भी आगे बढ़ते रहने की इच्छाशक्ति के महत्व पर जोर दिया। उनकी कहानी ने न केवल कैंसर रोगियों और इस बीमारी को मात देने वालों के लिए, बल्कि देखभाल करने वालों, पेशेवरों, छात्रों और जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे किसी भी व्यक्ति के लिए एक सशक्त संदेश दिया।
इसी क्रम में
डॉ. संजय दिवाकर ने सार्वजनिक नीति और नेतृत्व की यात्रा को रेखांकित किया
डॉ. संजय दिवाकर, उप निदेशक, नीति एवं योजना, उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश; संयुक्त कुलसचिव, डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ; और अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के लिए यूपी स्टेट नोडल अधिकारी ने प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने में जन जागरूकता और संस्थागत पहलों की भूमिका पर सभा को संबोधित किया।
डॉ. दिवाकर ने कैंसर जागरूकता से संबंधित सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों पर चर्चा की तथा नागरिकों के बीच अधिक जागरूकता पैदा करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक संस्थान, शैक्षणिक प्रतिष्ठान और समुदाय कैंसर की रोकथाम, शीघ्र पहचान और उपचार के बारे में विश्वसनीय जानकारी प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नीतिगत दृष्टिकोण से आगे बढ़ते हुए, डॉ. दिवाकर ने अपने जीवन के अनुभवों को भी साझा किया और उन संघर्षों तथा चुनौतियों के बारे में बात की जिनका सामना उन्हें नेतृत्व के पदों तक पहुंचने की अपनी यात्रा में करना पड़ा। उनके विचारों ने कॉन्क्लेव के मुख्य विचारों में से एक को पुष्ट किया: नेतृत्व अक्सर दृढ़ता, निरंतर प्रयास और प्रतिकूल परिस्थितियों में रचनात्मक प्रतिक्रिया देने की क्षमता से उभरता है।
प्रो. हरि राम ने कैंसर के प्रति अधिक जागरूकता का आह्वान किया
चर्चा में एक महत्वपूर्ण चिकित्सा दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर, प्रो. हरि राम ने कैंसर जागरूकता के बारे में विस्तार से बात की।
ओरल कैंसर, ट्रॉमा, ट्यूमर और टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट सर्जरी के एक प्रमुख विशेषज्ञ के तौर पर, प्रो. हरि राम ने दर्शकों को विभिन्न प्रकार के कैंसर के बारे में जानकारी प्रदान की और इस बीमारी के बोझ को कम करने में जागरूकता के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने चेतावनी के संकेतों को पहचानने, समय पर चिकित्सा सलाह लेने और आम जनता के बीच कैंसर की बेहतर समझ को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला। उनके संबोधन ने अनब्रोकन में वर्णित व्यक्तिगत कहानी को कैंसर जागरूकता के व्यापक संदर्भ में रखा और यह दर्शाया कि बीमारी के खिलाफ लड़ाई में जागरूक समुदाय क्यों आवश्यक हैं।
चर्चा ने कैंसर से जुड़े डर और कलंक (भ्रांतियों) से आगे बढ़ने के महत्व को भी रेखांकित किया। जागरूकता, समय पर हस्तक्षेप, चिकित्सा विशेषज्ञता तक पहुंच और रोगियों तथा उनके परिवारों के लिए भावनात्मक समर्थन इस बीमारी से लड़ने के लिए व्यापक प्रतिक्रिया के महत्वपूर्ण आयामों के रूप में उभरे।
साहस, जीवटता और नेतृत्व परस्पर जुड़े हुए मूल्यों के रूप में
इस कॉन्क्लेव की संकल्पना तीन परस्पर जुड़े हुए विचारों के इर्द-गिर्द की गई थी: साहस, जीवटता और नेतृत्व। चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि कैसे साहस व्यक्तियों को कठिन वास्तविकताओं का सामना करने में सक्षम बनाता है, जीवटता उन्हें असफलताओं के बावजूद आगे बढ़ने में मदद करती है, और नेतृत्व व्यक्तिगत अनुभव को दूसरों के लिए ताकत और दिशा के स्रोत में बदल देता है।
माइंडशेयर (MINDSHARE) के महासचिव और आईआईटी दिल्ली से स्ट्रैटेजी एवं पब्लिक पॉलिसी में पीएचडी, सैयद जुल्फी ने कॉन्क्लेव के बौद्धिक संदर्भ में योगदान दिया। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, यूके में पूर्व CICO फेलो व विजिटिंग स्कॉलर, और हिरोशिमा विश्वविद्यालय, जापान में पूर्व विजिटिंग स्कॉलर रहे जुल्फी ने ऐसे मंच बनाने के व्यापक महत्व पर प्रकाश डाला जहां व्यक्तिगत अनुभव, चिकित्सा, सार्वजनिक नीति, शिक्षा और नेतृत्व सार्थक संवाद के लिए एक साथ आ सकें।
कॉन्क्लेव ने पेशेवर सफलता या संस्थागत अधिकार के रूप में नेतृत्व की पारंपरिक समझ से परे चर्चा को ले जाने का प्रयास किया। डॉ. गुप्ता के अनुभव और अन्य वक्ताओं के दृष्टिकोण के माध्यम से, नेतृत्व प्रतिकूल परिस्थितियों को सहने, उद्देश्य को बनाए रखने और दूसरों को प्रेरित करने व समर्थन देने के लिए अपने अनुभवों का उपयोग करने की क्षमता के रूप में सामने आया।
प्रतिकूलताओं से परे जीवन पर एक प्रेरक संवाद
चिकित्सा, उच्च शिक्षा, विज्ञान, सार्वजनिक नीति और जीवन के अनुभवों के दृष्टिकोण के बीच हुए संवाद ने इस कॉन्क्लेव को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। जहां प्रो. हरि राम ने कैंसर के चिकित्सा और जागरूकता आयामों को संबोधित किया, वहीं डॉ. संजय दिवाकर ने सार्वजनिक नीति और व्यक्तिगत संघर्ष के दृष्टिकोण को सामने रखा। डॉ. अखिलेश गुप्ता की यात्रा ने इन विभिन्न आयामों को जोड़ने वाला मानवीय आख्यान प्रदान किया।
कार्यक्रम के केंद्र में एक सरल लेकिन शक्तिशाली विचार बना रहा: एक गंभीर संकट जीवन की दिशा को बदल सकता है, लेकिन यह उसकी संभावनाओं को निर्धारित नहीं कर सकता।
कैंसर के साथ एक असाधारण कठिन लड़ाई से गुजरने के बाद डॉ. गुप्ता की राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियों में वापसी ने इस संदेश को बेहद व्यक्तिगत तरीके से चित्रित किया। उनकी कहानी ने गंभीर प्रतिकूलताओं से निपटने में व्यक्तियों की मदद करने के लिए परिवार, देखभाल करने वालों, चिकित्सा पेशेवरों, सहकर्मियों और संस्थानों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
कॉन्क्लेव ने प्रतिभागियों, विशेष रूप से युवाओं को जीवटता (रेज़िलिएंस) को दर्द या कठिनाई की अनुपस्थिति के रूप में नहीं, बल्कि उनके बावजूद एक उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने की क्षमता के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित किया। इसने इस बात पर भी जोर दिया कि वास्तविक नेतृत्व संघर्ष,दृढ़ता और सेवा की भावना से आकार ले सकता है।
माइंडशेयर और लखनऊ क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह कॉन्क्लेव कैंसर जागरूकता, शीघ्र पहचान, भावनात्मक मजबूती और जिम्मेदार नेतृत्व पर नए सिरे से जोर देने के साथ संपन्न हुआ।
इस आयोजन के अंत में महाविद्यालय की इतिहास विभाग की सहायक आचार्या डॉ.अल्पना बाजपेई जी ने मुख्यातिथि,अतिथियों,सभी संकायों के आचार्यों तथा छात्र-छात्रों का आभार ज्ञापित किया इस प्रकार यह संगोष्ठी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।
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