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जबलपुर : : बिजली कम्पनियों में कार्यरत संविदा आधार पर अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों को नियमित करने हेतु मध्यप्रदेश शासन के ऊर्जा विभाग द्वारा नई अनुकंपा नियुक्ति नीति जारी की गई है उसी के पालनार्थ बिजली कंपनियों द्वारा भी आदेश जारी किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि नई अनुकंपा नियुक्ति नीति जारी करने के लिए मध्यप्रदेश शासन के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर जी, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा, ऊर्जा सचिव जी और सभी एमडी गणों का फेडरेशन अभिनंदन,आभार व्यक्त करता है किंतु उपरोक्त नई अनुकंपा नीति में व्याप्त महत्वपूर्ण विसंगतीया हैं, जिससे पूरे प्रदेश में सम्बंधित कर्मचारियों में असहजता, असमानता, असुरक्षा की भावना निर्मित हो रही है। जिससे उन्हें लग रहा है कि इस आदेश के कारण सभी सीनियर जूनियर हों जाएंगे, और जूनियर सीनियर बन जाएंगे। वहीं वेतन में भी विसंगति निर्मित हो जाएंगी।वर्षों से इस नीति, निर्णय का इंतजार कर रहे अनुकंपा आश्रितों को अपना भविष्य फिर असुरक्षित महसूस हो रहा है। मध्य प्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ, फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने माननीय ऊर्जा मंत्री जी, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा, ऊर्जा सचिव और सभी एमडी गणों को पत्र प्रेषित कर आग्रह किया है कि नीति में व्याप्त निम्नलिखित विसंगतियों,बिन्दुओं पर समुचित ध्यान देकर इसका निराकरण कराया जाएं, तभी इन अनुकंपा आश्रितों को इसका समुचित लाभ मिल सकेगा।
संविदा सेवा अवधि की उपेक्षा:- 08 से 10 वर्षों की सतत सेवा को वरिष्ठता में समुचित रूप से नहीं जोड़ा जा रहा है।
अनुभव की अनदेखी :- दीर्घकालीन अनुभवी कर्मचारियों को नवीन भर्ती के समकक्ष माना जा रहा है
वेतन में संभावित गिरावट :- वर्तमान लगभग रू 27,000/-, 28,000 मानदेय की तुलना में वेतन अत्यंत कम होने की स्थिति निर्मित हो रही है।
वेतन संरक्षण का अभाव : वेतन हेतु कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है।
सीपीसीटी पात्रता संबंधी अव्यावहारिकता : ऐसे अनेक अनुकंपा संविदा कर्मचारी, जिनकी नियुक्ति उस समय हुई जब सीपीसीटी अनिवार्य नहीं था। वर्तमान में वर्षों की सेवा के उपरांत भी सीपीसीटी योग्यता के अभाव में लाभ नहीं मिल पाएगा।अनुकम्पा नियुक्ति कर्मियों को नियमित पद पर नियमित करने के लिए शपथ पत्र जैसी अन्य औपचारिकता करना उचित नहीं है, क्योंकि यह नई भर्ती नहीं है,इन्हें सीधे नियमित किया जावे। हायर सेकेण्डरी पास को भी कार्यालय सहायक श्रेणी तीन के पद पर नियुक्त किया जाये।
मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि संबधित कर्मचारियों के हित में निम्न संशोधन आवश्यक रूप से किए जाना चाहिए।
कर्मचारियों को मूल नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता का लाभ प्रदान किया जाए।
वेतन संरक्षण सुनिश्चित किया जाए जिससे किसी भी कर्मचारी के वेतन में कमी न हो।
संविदा सेवा अवधि को वेतन निर्धारण एवं पदोन्नति में जोड़ा जाए।
अनुभव के आधार पर उच्चतर वेतन निर्धारण/अग्रिम वेतन वृद्धि प्रदान की जाए।
सीपीसीटी पात्रता में पूर्ण छूट प्रदान किया जाए उन कर्मचारियों कोः जिनकी नियुक्ति सीपीसीटी लागू होने से पूर्व हुई है, जो वर्षों से बिजली कंपनियों में सतत सेवा में कार्यरत हैं, जिन्होंने कार्यानुभव के आधार पर अपनी दक्षता सिद्ध की है (अथवा वैकल्पिक रूप से पूर्व में प्रथम नियुक्ति दिनांक अनुसार सेवा/कार्य अनुभव को ही सीपीसीटी के समकक्ष मानते हुए पूर्ण रूप से छूट प्रदान की जाए)। जब तक नई नीति में संशोधन नहीं हो तब तक संबंधित सभी अनुकंपा आश्रितों को बिना शर्त नियमित कर नये पद पर ज्वाइन कराया जाएं।
फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक,एन के यादव, उमाशंकर मेहता, अफसार अहमद,दिनेश दुबे,बी एस राठौर, आर के कौशिक, रामेश्वर गांगे, उमाशंकर दुबे, जी एल चौरसिया, अनूप वर्मा, मदन वर्मा,गोपाल चौहान,विमल महापात्र, पुष्पेंद्र यादव, कार्तिक शर्मा, योगेश पटेल, मोहित पटेल, अक्षय श्रीवास्तव, मनोज पाठक, दिलीप पाठक ने माननीय ऊर्जा मंत्री जी, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा, ऊर्जा सचिव, एवं सभी सीएमडी गणों से अनुरोध करते हुए कहा कि बिजली कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों के हित को दृष्टिगत रखते हुए जारी आदेश में कृपया उपरोक्त संशोधन आवश्यक रूप से करने की कृपा करें। जब तक नई नीति में संशोधन नहीं हो रहा है तब तक के लिए सभी संबंधित कर्मचारियो को बिना शर्त के संबंधित पद पर नियमित नियुक्ति प्रदान की जाएं।उपरोक्त विसंगतियां दूर होने पर फेडरेशन आपका अत्यंत अभारी रहेगा।
– मदन वर्मा, प्रदेश प्रवक्ता
म प्र विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन
जबलपुर शाखा: इंदौर
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