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NDA हुई और मजबूत लोकसभा में बढ़ी ताकत…
संसद के मॉनसून सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष नए आंकड़ों के साथ दोनों सदनों में होंगे। विभिन्न दलों में हुई व्यापक टूट के चलते सत्तारूढ़ एनडीए मजबूत हुआ है और विपक्ष की ताकत घटी है।
ऐसे में सरकार के पास बजट सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक पर मिली हार को जीत में बदलने की संभावनाएं भी बनी है। सबसे कठिन अंकगणित लोकसभा का है, जहां मौजूदा सदन में संविधान संशोधन के लिए 360 का आंकड़ा जरूरी है। एनडीए इसके काफी करीब पहुंचा है। पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं। इससे लोकसभा के समीकरण बदल गए हैं।
तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी टूट हुई है और द्रमुक ने विपक्षी इंडिया गठबंधन से दूरी बना ली है। दो दलों तृणमूल कांग्रेस व शिवसेना (यूबीटी) से अलग हुए सांसदों की संख्या 26 हो गई है। द्रमुक के पास 22 सांसद है। यानी 48 सांसद अब कांग्रेस के साथ नहीं होंगे।
बदल रहा है सदन का अंकगणित
एनडीए को बजट सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक पर 298 सांसदों का समर्थन हासिल हुआ था। यानी जरूरी 360 से 62 कम। अब विपक्षी खेमे से अलग हुए इन सांसदों को विधेयक के पक्ष में माना जाए, तब भी उसे 14 सांसद कम पड़ेंगे। हालांकि, यह तय नहीं है कि द्रमुक विधेयक का समर्थन करेगा या नहीं। द्रमुक के मतदान से दूर रहने पर सदन की संख्या कम होने पर भी एनडीए को 342 सांसदों की जरूरत होगी। तब भी उसे 18 और सांसदों के समर्थन की दरकार होगी।
सपा और कांग्रेस के रिश्ते पर भी नजर
उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के रिश्ते कैसे रहते हैं, यह भी महीने भर में काफी कुछ स्पष्ट हो सकते हैं। इस पर भी एनडीए की नजर है। एनडीए सूत्रों का कहना है कि अभी जो स्थिति बनी है, उससे सरकार की ताकत बढ़ी है और विपक्ष के कई दलों के कई सांसद अब फिर से महिला आरक्षण विधेयक पर अपनी राय बदल सकते हैं।
सदन में द्रमुक का रुख होगा अहम
अभी समर्थन को जुटाना एनडीए के लिए कठिन है, लेकिन सत्र को शुरू होने में लगभग एक माह का समय बाकी है। तब तक कुछ और राजनीतिक उठापटक देखने को मिल सकती है। द्रमुक में भी विधेयक को लेकर मतभेद हैं। ऐसे में एनडीए उसे साधने की कोशिश करेगा। राकांपा (8), आप (3) व झामुमो (3) की स्थिति तब तक क्या रहेगी, यह भी देखना होगा। अगर इन दलों के सांसद भी पाला बदलते हैं या समर्थन में खड़े होते हैं और द्रमुक का भी समर्थन मिलता है तो 360 का आंकड़ा हासिल किया जा सकता है।
उद्धव गुट के सांसदों की बगावत पर भड़की कांग्रेस
कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में बगावत को लेकर गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि शाह लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए एनडीए को ‘नेशनल डिफेक्टर्स अलायंस’ (दलबदलुओं का गठबंधन) बनाने पर आमादा हैं, लेकिन वह अपने मकसद में कामयाब नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व विपक्षी एकजुटता को बरकरार रखने और इन प्रयासों को विफल करने के लिए अपने सहयोगी दलों के साथ निरंतर संपर्क में है। कांग्रेस नेता ने कहा कि गृह मंत्री और भाजपा द्वारा जो किया जा रहा है, वह लोकतंत्र पर हमला है।
बागियों को सेना की मदद लेनी होगी : राउत
शिवसेना उद्धव गुट के छह सांसदों के बैठक में शामिल नहीं होने के बाद पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय राउत जमकर बरसे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार चीजें आसान नहीं हैं और बागियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि गद्दार न तो घर जा पाएंगे और न ही अपने चुनाव क्षेत्रों में। उन्हें माकूल सबक सिखाया जाएगा। घर पहुंचने के लिए उन्हें सेना की मदद लेनी पड़ेगी। संजय राउत ने दावा किया कि उनकी पार्टी के बागी सांसदों को अतिरिक्त 10 करोड़ रुपये दिए गए हैं और उन्हें राजस्थान में एक सुरक्षित जगह पर भेजा गया है। उन्होंने मांग की कि इन नेताओं और उनकी संपत्तियों को दी गई सुरक्षा वापस ली जाए।
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