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(सुरेन्द्र कुमार वर्मा)
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के चर्चित आजाद बिन्द दूल्हा हत्याकांड के एक लाख रुपये के इनामी आरोपी भोले राजभर को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने आरोपी को 60 दिनों की मोहलत देते हुए इस अवधि के दौरान उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हालांकि, अदालत ने भोले राजभर के खिलाफ दर्ज हत्या के मुकदमे (FIR) को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया यह मामला
जौनपुर जिले के खेतासराय थाने में बीती 2 मई 2026 को आजाद बिन्द दूल्हा हत्याकांड के संबंध में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने भोले राजभर को नामजद किया था, जिसके बाद से वह फरार चल रहा था। पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
याची भोले राजभर का पक्ष: याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वह पूरी तरह बेगुनाह है और उसे इस मामले में साजिश के तहत फर्जी फंसाया गया है। इसलिए एफआईआर को निरस्त किया जाए और पुलिसिया कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
सरकारी वकील का पक्ष: राज्य सरकार की ओर से इस याचिका का कड़ा विरोध किया गया। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि आरोपी पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और वह एक लाख रुपये का इनामी अपराधी है, इसलिए उसे कोई राहत नहीं मिलनी चाहिए।
अदालत ने फैसला और सख्त निर्देश दिया है
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विवेक सारण की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला एफआईआर निरस्त करने योग्य नहीं है। अदालत ने एफआईआर रद्द करने की मांग को तो ठुकरा दिया, लेकिन आरोपी के अनुरोध पर उसे कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने का एक मौका जरूर दिया।
”यदि भोले राजभर पहले से गिरफ्तार नहीं है, तो अगले 60 दिनों तक उसे इस मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इस अवधि के भीतर उसे संबंधित निचली अदालत में आत्मसमर्पण Surrenderकर नियमित या अग्रिम जमानत की अर्जी देनी होगी, जिस पर नियमानुसार विचार किया
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि आरोपी तयशुदा 60 दिनों के भीतर अदालत के सामने आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो उसे दी गई राहत स्वतः समाप्त हो जाएगी और पुलिस उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी
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