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अशोक गहलोत के इस बयान से देश की राजनीति में आया भूचाल…
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने जयपुर में पत्रकारों से खुलकर बातचीत की और इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर जमकर राजनीतिक तीर चलाए।
गहलोत ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस के नरम रुख के कारण ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) आज देश में इस मजबूत स्थिति तक पहुंच पाया है।
इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि देश असल में “BJP-RSS के राज में हिंदू राष्ट्र” बन चुका है, और अब सिर्फ इसकी औपचारिक घोषणा होना ही बाकी रह गया है। उनके इस बयान के बाद राज्य और देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
कांग्रेस के नरम व्यवहार के कारण ही देश में पनप पाए बीजेपी और आरएसएस
अशोक गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद गंभीर लहजे में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा कांग्रेस पर बदले की भावना से काम करने का मनगढ़ंत आरोप लगाती रहती है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस ने केंद्र या राज्यों में सत्ता में रहते हुए सचमुच इसी बदले की भावना से काम किया होता, तो आज देश में न तो आरएसएस खड़ा हो पाता और न ही भाजपा इतनी बड़ी पार्टी बन पाती।
गहलोत ने आगे कहा, “मैं बहुत सोच-समझकर यह बात बोल रहा हूं कि आज RSS अगर सफलता के इस मुकाम तक आया है, तो यह सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस के नरम रुख के कारण ही संभव हो सका है। इन लोगों ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए 100 साल का लंबा समय निकाल दिए। आज इनकी जो हरकतें देश में दिख रही हैं,अगर उस ढंग से कांग्रेस ने पहले ही BJP-RSS के साथ कड़ा व्यवहार किया होता, तो आज न तो भाजपा देश में इतना पनपती और न ही आरएसएस का इतना विस्तार हो पाता।”
देश असल में हिंदू राष्ट्र बन चुका है, केवल औपचारिक घोषणा होनी है बाकी
कांग्रेस के दिग्गज नेता ने संघ के पुराने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर इतिहास में दो बार कड़ा प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन बाद में संगठन द्वारा लिखित में माफी मांगने के बाद ही उस प्रतिबंध को हटाया गया था। देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग धार्मिक त्योहारों के मौके पर होने वाली हिंसा और तनाव की घटनाओं की ओर सीधा इशारा करते हुए गहलोत ने दावा किया कि आज के इस दौर में अल्पसंख्यकों की आवाज को पूरी तरह दबाया जा रहा है। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने साफ कहा, “देश असल में अंदरूनी तौर पर हिंदू राष्ट्र तो बन ही चुका है; अब खाली इसकी एक औपचारिक घोषणा सरकार की तरफ से की जानी बाकी है।”
अल्पसंख्यकों को दबाया जा रहा है, चुनी हुई सरकारें और पार्टियां तोड़ी जा रहीं
अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि देश के भीतर अल्पसंख्यकों को लगातार दबाने की कोशिशें की जा रही हैं, चाहे वे मुस्लिम अल्पसंख्यक हों, या फिर सिख और ईसाई समाज के लोग हों। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में देश के भीतर ऐसे हालात पहले कभी नहीं देखे। उन्होंने आशंका जताई कि अगर इसी तरह चलता रहा, तो अल्पसंख्यकों के खिलाफ इन ताकतों के हौसले दिन-ब-दिन और बढ़ते जाएंगे और ये सत्ता के नशे में कुछ भी कर सकते हैं।
लोकतंत्र के मौजूदा ढांचे पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “मैं जो बात बार-बार सार्वजनिक मंचों से कह रहा हूं कि अगर आज के दौर में इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री होतीं, तो वह इन हरकतों पर तुरंत प्रतिबंध लगा देतीं। आपके इस सवाल का पूरा जवाब मेरी इसी एक बात में छिपा हुआ है। आज देश में जो राजनीतिक और सामाजिक हालात बन गए हैं, उन्हें बहुत गहराई से समझने की जरूरत है। देश में जिस तरह की अनैतिक हरकतें सरेआम हो रही हैं, और जिस तरह से जनता द्वारा चुनी हुई विपक्षी सरकारें और मजबूत पार्टियां पैसों और सत्ता के दम पर तोड़ी जा रही हैं, वह हमारे जीवंत लोकतंत्र के लिए बेहद घातक साबित हो रहा है।”
अगर आज इंदिरा गांधी जैसी नेता होतीं तो भाजपा को कर देतीं प्रतिबंधित
इससे पहले भी जयपुर में आयोजित एक अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम में गहलोत ने इसी तरह का कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि अगर आज देश में इंदिरा गांधी जैसी मजबूत और साहसी नेता होतीं, तो वह भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी पर तुरंत प्रतिबंध लगा देतीं। उन्होंने कहा कि कोई भी दल भारत में हिंदुत्व और धर्म के आधार पर राजनीति नहीं कर सकता, क्योंकि हमारा पवित्र संविधान किसी को भी धर्म के नाम पर नफरत फैलाने या राजनीति करने की इजाजत बिल्कुल नहीं देता।
दूसरी तरफ, गहलोत के इन तीखे हमलों पर भाजपा ने भी तुरंत पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ताओं ने कांग्रेस पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी के नेता आज भी “आपातकाल (Emergency) वाली पुरानी और तानाशाही मानसिकता” से पूरी तरह ग्रस्त हैं, और वे जनता द्वारा चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को पचा नहीं पा रहे हैं।
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