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तेरे जाने के बाद मां…

जेडी न्यूज़ विज़न…..

तेरे जाने के बाद मां…

मां! तू नहीं है, फिर भी घर का पता नहीं बदला।
सब कुछ बदल गया, फिर भी कुछ नहीं बदला।
दिवाली आती है, पर रोशनी नहीं लगती
तेरी आंखों के दिए जो अब नहीं जलते।
होली आती है पर मिठास नहीं रही उसमें
मां, अब तो गुझिया भी मीठी नहीं लगती।
जो भाई अपनी गुल्लक तोड़ कर राखी की भेंट लाते थे,
वही अब हक त्याग के कागज़
तैयार कराते हैं।
तेरी संपत्ति, मकान, खेत से भले हक लेलें मेरा
पर तुझे याद करने के हक से तो कोई वंचित नहीं कर सकता।
जब तन मन टूटने लगते हैं थकन से मां,
बहुत याद आती है बालों में फिरती उंगलियां तेरी।
लोग कहते हैं वक्त सब भुला देता है पर
मां तुझे भूलने के लिए तो एक जीवन भी कम है।
तेरे जाने के बाद ही जान पाई मैं
तेरी दुआओं में आवाज़ नहीं होती।
घर में सभी कुछ हैं, सभी साधन भी हैं फिर भी
तेरी ही कमी सालती है।
बस तेरी ही कमी पूरी नहीं होती।
बस कमी पूरी नहीं होती।

सुनीता जैन ‘ रूपम ‘
अजमेर

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