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कविता: : पिता छायादार वृक्ष…..

जेडी न्यूज विजन…

कविता –

पिता छायादार वृक्ष
—–
पिता है तो काहे का डर है।
पिता है तो शक्ति है संबल है।
पिता है तो सपने साकार होंगे।
पिता है तो हर जिद पूरी होगी।।

पिता का सिर पर हाथ हो तो,
लाड़ दुलार है, उनके घर आने
पर मन को मिलता आकार है।
पिता है तो दुनियां जीत लेंगे।।

पिता के काम से लौटते ही मिल
जाती है सारी खुशियां भर जाता
मन, पिता तो वृक्ष छायादार है,
पिता से अलग मां का वात्सल्य।।

माता-पिता दोनों का साथ जरूरी,
दोनों पालते है, नवजीवन संस्कार
बच्चों में ढालते, जीना सिखाते हैं,
चरित्र निर्माण के महागुरु हैं हमारे।।

– मदन वर्मा “माणिक”
इंदौर, मध्यप्रदेश

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